Sunday, March 6, 2011
The Battleship Potemkin
The Battleship Potemkin , is a 1925 silent film directed by Sergei Eisenstein and produced by Mosfilm. It presents a dramatized version of the mutinythat occurred in 1905 when the crew of the Russian battleship Potemkin rebelled against their officers of the Tsarist regime.
The Battleship Potemkin has been called one of the most influential propaganda films of all time, and was named the greatest film of all time at the Brussels World's Fair in 1958.
The film is in the public domain in some parts of the world
Friday, February 18, 2011
Shaheed Bhagat Singh

भगत सिंह की पसंदीदा शायरी
यह न थी हमारी किस्मत जो विसाले यार होता
अगर और जीते रहते यही इन्तेज़ार होता
तेरे वादे पर जिऐं हम तो यह जान छूट जाना
कि खुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता
तेरी नाज़ुकी से जाना कि बंधा था अहदे फ़र्दा
कभी तू न तोड़ सकता अगर इस्तेवार होता
यह कहाँ की दोस्ती है (कि) बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म गुसार होता
कहूं किससे मैं के क्या है शबे ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता
(ग़ालिब)
इशरते कत्ल गहे अहले तमन्ना मत पूछ
इदे-नज्जारा है शमशीर की उरियाँ होना
की तेरे क़त्ल के बाद उसने ज़फा होना
कि उस ज़ुद पशेमाँ का पशेमां होना
हैफ उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ग़ालिब
जिस की किस्मत में लिखा हो आशिक़ का गरेबां होना
(ग़ालिब)
मैं शमां आखिर शब हूँ सुन सर गुज़श्त मेरी
फिर सुबह होने तक तो किस्सा ही मुख़्तसर है
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबाने अक़्ल
लेकिन कभी – कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे
न पूछ इक़बाल का ठिकाना अभी वही कैफ़ियत है उस की
कहीं सरेराह गुज़र बैठा सितमकशे इन्तेज़ार होगा
औरौं का पयाम और मेरा पयाम और है
इश्क के दर्दमन्दों का तरज़े कलाम और है
(इक़बाल)
अक्ल क्या चीज़ है एक वज़ा की पाबन्दी है
दिल को मुद्दत हुई इस कैद से आज़ाद किया
नशा पिला के गिराना तो सबको आता है
मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साकी
(ग़ालिब)
भला निभेगी तेरी हमसे क्यों कर ऍ वायज़
कि हम तो रस्में मोहब्बत को आम करते हैं
मैं उनकी महफ़िल-ए-इशरत से कांप जाता हूँ
जो घर को फूंक के दुनिया में नाम करते हैं।
कोई दम का मेहमां हूँ ऐ अहले महफ़िल
चरागे सहर हूँ बुझा चाहता हूँ।
आबो हवा में रहेगी ख़्याल की बिजली
यह मुश्ते ख़ाक है फ़ानी रहे न रहे
खुदा के आशिक़ तो हैं हजारों बनों में फिरते हैं मारे-मारे
मै उसका बन्दा बनूंगा जिसको खुदा के बन्दों से प्यार होगा
मैं वो चिराग हूँ जिसको फरोगेहस्ती में
करीब सुबह रौशन किया, बुझा भी दिया
तुझे, शाख-ए-गुल से तोडें जहेनसीब तेरे
तड़पते रह गए गुलज़ार में रक़ीब तेरे।
दहर को देते हैं मुए दीद-ए-गिरियाँ हम
आखिरी बादल हैं एक गुजरे हुए तूफां के हम
मैं ज़ुल्मते शब में ले के निकलूंगा अपने दर मांदा कारवां को
शरर फ़शां होगी आह मेरी नफ़स मेरा शोला बार होगा
जो शाख-ए- नाज़ुक पे आशियाना बनेगा ना पाएदार होगा।
www.marxists.org/archive/bhagat-singh/index.htm
www.shahidbhagatsingh.org
Friday, March 26, 2010
धर्म और राजनीति

भारत में धर्म के नाम पे राजनीति होना कोई नई बात नहीं है इसमें मुख्य बात यह है की यह धर्म के नाम पर राजनीति होती क्यों है | कुछ पार्टियाँ अपनी राजनीति भुनाने में इन हथकंडो का भरपूर सहारा लेती है| लेकिन जनता को यह समझना चाहिए की इससे सिर्फ मानवता और इंसानियत ही ख़त्म होती है ना की हमारी दिक्कतें | कुछ पार्टियाँ तो यह भी कहती है की हिंदुस्तान में सिर्फ हिन्दुओं को रहने का हक है अगर अन्य धरम के लोग यहाँ रहे तो हिन्दू अल्पसंख्यक हो जायेंगे और दोबारा उन्ही धर्मों का राज़ होगा जो यहाँ पहले महल बनवाया करते थे जिनकी पीड़ी दर पीड़ी राज करती थी |
यह सब खोकली बातें है इनका कोई महत्त्व नहीं है ...भारत में एक बड़ी जनसँख्या जो गरीबी में बसर करती है जिसे आज तक आजादी नहीं मिली जो अपनी ज़िन्दगी सिर्फ दो वक़्त की रोटी कमाने के लिए गुज़ार देती है जिसे कोई सुविधा नहीं मिली उसके लिए २६ जनवरी और १५ अगस्त का कोई महत्त्व नहीं और यह लाजमी बात भी है | क्या यह गरीब मजदूर और किसान लोग इसलिए पैदा हूए की काम करे और दो वक़्त की रोटी के लिए भी तरसें जो इनका हक है बाकी शौक तो इन्हें पता ही नहीं होते क्या है | ८४ और गोधरा दंगों में कितने बेकसूर लोगों की जान गयी लेकिन इन्हें कराने वालों का आज तक कोई बाल भी बाका नहीं कर पाया | धर्म के चक्कर में आकर भ्रष्ट पार्टिओं को वोट देने का एक कारण अशिक्षा भी है | साफ़ बात तो यह है की लोगों को मानवता पे विश्वास करना चहिये ना की धर्म की आड़ में राजनीती करने वालों का |
Thursday, March 25, 2010
WE ARE NOT PAPPU
Media and politician says to the youngsters who are not cast vote are known as PAPPU.
we are young generation of india and ofcource the future of India.
i want to ask the people who used this word for us.
why and on what basis they use this word for us?
Because we are stylish people ..we have expensive cell phones and gadgets ,we are in relation,
we like sports ,we are rocking guys..etc ?
but it doesn`t means we are foolish people..we have huge knowwledge in every field
can you tell me why we cast vote....we are not believe in these political drama
where uneducated , corrupt people are judging our future ...mostly all are corrupt ......
you(politician and media) think than you(young generation) should use "You can opt not to VOTE for ANYONE" option
http://www.pehleindia.com/DiscussionMess
then tell me whats the benefit of this option... again new candidate who are corrupt is elected.
Thats why we boycott the political drama. we are smart,intelligent and responsible ...
we dont want your suggestion....
Dont use this word for us.This is WARNING not request.
Young Generation
Long live revolution