अनुवाद:- रुपिंदर
Tuesday, March 6, 2012
क्या जनसंख्या वास्तव में मूल कारण है ?
अनुवाद:- रुपिंदर
Sunday, March 4, 2012
क्या ईश्वर ने ब्रह्माण्ड की रचना की ? Stephen Hawkings

हमारे पास है पधार्थ और हमारे पास है उर्जा और ब्रह्माण्ड को बनाने के लिए जिस तीसरी चीज़ की जरूरत पड़ेगी वह है अंतरिक्ष...एक विशाल अंतरिक्ष! आप इसे सब कुछ कह सकते है अध्बूत ,खूबसूरत, हिंसक लेकिन इसे एक उपमा नही दिया जा सकता यह नहीं कहा जा सकता की यह तंग है हम जहाँ भी देखे हमें अंतरिक्ष नज़र आता है एक अंतहीन अंतरिक्ष चारों ओर फैला हूया ...बस इतना सिर चकरा देने के लिए काफी है |
तो फिर यह सारा पधार्थ ,ऊर्जा,अंतरिक्ष आया कहाँ से ?हमें बीसवी सदी तक इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था इसका जवाब एक व्यक्ति की अदभूत समझदारी से मिला |शायद धरती पे हूया सबसे अदभूत वैज्ञानिक -अल्बर्ट आइंस्टाइन |
आइन्स्टाइन ने बड़ी एक अजीब सी चीज़ देखी ब्रह्माण्ड को बनाने के लिए जो दो मुख्या चीज़ें चाहिए थी पधार्थ और ऊर्जा असल में वोह एक ही है | यह कहा जा सकता है की एक ही सिक्के के दो पहलु है इनके मशहूर सूत्र E=mc2 का मतलब है की पधार्थ को उर्जा और उर्जा को पधार्थ की तरह समझा जा सकता है इसलिए हमें ब्रह्माण्ड बनाने के लिए अब तीन चीजों की जगह दो चीजों की जरूरत है उर्जा और अंतरिक्ष तो फिर ये सारी उर्जा और अंतरिक्ष आया कहाँ से इसका जवाब वैज्ञानिकों की कई दशकों की लंबी खोजो के बाद मिला उर्जा और अंतरिक्ष एक घटना के बाद अपने आप पैदा हूए थे जिससे आज हम बिग बेंग के नाम से जानते है |
बिग बेंग के समय एक पूरा ब्रह्माण्ड उर्जा से भरपूर अस्तित्व में आया जिसका अपना अंतरिक्ष भी था
यह ऐसे फूल रहा था जैसे किसी गुब्बारे को फुलाया जा रहा हो|
तो फिर ये अंतरिक्ष और उर्जा आये कहाँ से ?
उर्जा से भरपूर ये पूरा ब्रह्मांड अंतरिक्ष का ये अदभूत विस्तार और इसमें मौजूद हर चीज़ क्या अचानक पैदा हो गयी? कुछ लोग मानते थे ये सब ईश्वर का ही पैदा किया गया था|
लेकिन विज्ञान कुछ और कहता है हम पधार्थ और ऊर्जा के उस फोर्मुले के पार जा सकते है जिसकी खोज आइन्स्टाइन ने की थी हम कुदरत के नियमों का इस्तेमाल ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति को समझने के लिए कर सकते है |
बिग बेंग से जो सबसे बड़ा रहस्य जूडा हूया है वो यह की अंतरिक्ष और उर्जा का यह अदभूत विशाल अंतरिक्ष अचानक कैसे पैदा हो गया होगा इसका रहस्य ब्रह्माण्ड से बहुत ही अजीब तथ्य से जूडा हूया है|
भौतिकी के नियम नकारात्मक उर्जा नामक एक अस्तित्व की चीज़ की मांग करते है
इसे समझने के लिए एक छोटी से मिसाल देता हूँ कल्पना कीजिये एक आदमी एक सपाट मैदान में एक पहाड बनाना चाहता है यह पहाड ब्रह्माण्ड को दर्शायेगा | इस पहाड को बनाने के लिए वोह ज़मीन में एक गड्डा खोद रहा है और इस मिटटी से अपना पहाड बनाता है पर इस तरह वेह एक पहाड ही नहीं बना रहा वह एक गड्डा भी बना रहा है इसे हम पहाड का नकारात्मक रूप भी कह सकते है जो मिटटी अब तक गड्डे में थी अब पहाड बंद चुकी है ब्रह्मांड के शुरुआत में क्या हूया होगा इसके पीछे भी यही सिद्धांत काम करता है जब बिग बेंग ने बड़ी मात्र में सकारात्मक उर्जा पैदा की होगी उसने उतनी ही उर्जा में नकारात्मक उर्जा भी पैदा की होगी इस तरह से नकारात्मक और सकारात्मक बना के शून्य बनाते हैं हमेशा ...ये कुदरत का एक और नियम है
तो आज फिर वोह सारी नकारात्मक उर्जा कहाँ है ये हमारे कॉस्मिक के तत्व में है अंतरिक्ष में |
अंतरिक्ष अपने आप में नकारात्मक उर्जा का विशाल भंडार है इतना बड़ा भंडार की सारी चीज़े मिलकर शून्य बनाये| ब्रह्माण्ड के battery की तरह है जिसमें नकारत्मक ऊर्जा जमा होती रहती है|
अब जरा सकारत्मक रूप देखे हम जो पधार्थ और ऊर्ज ा आज देखते है वोह एक पहाड की तरह है
और इसी के पास बना गद्दा या नकारात्मक रुप असल में अंतरिक्ष के पास फैला हूया है|
तो क्या कोई सचमुच ईश्वर है इसका मतलब क्या है ?
इसका मतलब यह है की कोई अगर यह ब्रह्माण्ड शून्य ही है तो इसमें किसी ईश्वर की जरूरत नहीं है|
क्यूंकि हम जानते है की ब्रह्माण्ड के नकारत्मक और सकारात्मक रूप मिलाकर शून्य बनाते है तो बस हमें यह समझना है की क्या या मैं ये कहूँ की कौन है जिसने पहली बार इस प्रक्रिया को शुरू किया होगा |
ऐसा क्या हूया की अचानक ब्रह्माण्ड उभर आया होगा |
पहली नज़र में ये परेशानं कर देने वाली समस्या लगती है क्यूंकि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में चीज़ें अचानक प्रकट नही हो जाति |
क्या ऐसा हो सकता है हम चुटकी बजाये और कॉफी सामने आजये... उसे हमे दूसरी चीजो से मिलकर बनाना पड़ता है जैसे काफी पावडर, पानी , दूध,शक्कर लेकिन अब जरा काफी की इस कप के अंदर जाइये तो दूध के कणों से गुजरते हुए आप अटॉमिक (atomic)स्तर पर पहुंचे और फिर सब अटॉमिक स्तर पर पहुँच जाए तो आप एक ऐसी दुनिया में पहुँच सकते है जहाँ कुछ नहीं से कुछ प्रकट होना मुमकिन है भले ही थोड़ी समय के लिए ही ऐसा इसलिए क्यूंकि इस स्तर पर प्रोटोन जैसे कण कुदरत के नियमों के अनुसार बर्ताव करते है जिसे हम इसे (quantum mechanics) कुअनतम मेकानिक्स कहते है और वो सचमुच अचानक प्रकट हो सकते है थोड़ी देर तक रुक सकते है और फिर दोबारा गायब हो सकते है ताकि कहीं और प्रकट हो सके क्यूंकि हमे पता है की कभी ब्रहमांड बहुत छोटा था एक प्रोटोन से भी छोटा| इसका एक बड़ा ही असाधारण मतलब है... इसका मतलब अपने असीम और चक्र देने वाले विस्तार जटिलता के बावजूद ब्रह्माण्ड कुदरत के नियमों को तोड़े बिना अस्तित्व में आ गया होगा उस पल के बाद से बड़ी मात्र में उर्जा निकली और अंतरिक्ष में फ़ैल गया एक ऐसी जगह जहाँ सारी नकारत्मक उर्जा जमा हो सकती थी ताकि सबकुछ संतिलित हो सके |
आइन्स्टीन ने बताया है बिग बेंग के समय एक हैरत भरी घटना घटी होगी और वोह थी ” समय की शुरुआत” दिमाग चक्र देने वाले इस विचार को समझने के लिए इस बात पर विचार कीजिये
अंतरिश में एक ब्लैक होल तैर रहा है
एक आम ब्लैक होल ऐक बहुत विशाल तारा होता है जो अपने ही भीतर ढय जाता है ये इतना विशाल होता ही इसके गुरुत्व से प्रकाश भी बहार नहीं जा सकता इसलिए यह हमेश घना कला होता है इसका गुरुत्व छेत्र इतना ताकतवर होता है ना सिर्फ रौशनी बल्कि समय को भी अपने में खींच लेता है इसे समझने के लिए कल्पना कीजिये एक घडी ब्लैक होले की तरफ खींची जा रही है जैसे जैसे वोह उसके नज़दीक जायेगी समय धीरे होता जायेगा और अंत में रुक जायेगा वोह इसलिए नहीं रुकी क्यूंकि वोह बिगड गयी है वोह इसलिए रुकी क्यूंकि ब्लैक होले के अंदर समय का अस्तित्व ही नहीं है और ब्रह्माण्ड की शुरुवात में येही हूया होगा|
आप बिग बेंग से पहले के समय में नहीं पहुँच सकते क्यूंकि बिग बेंग से पहले कुछ नहीं था आख़िरकार हमने ऐसी चीज़ खोज ली है जिसका कोई कारण नहीं क्यूंकि तब समय था ही नहीं इसका मतलब यह है की ब्रहमांड का कोई रचनकार हो ही नहीं सकता क्यूंकि जब समय ही नहीं था तो फिर रचनाकार कैसे हो सकता है |
क्यूंकि खुद समय भी बिग बेंग के दौरान शुरू हूया था इसका मतलब यह ऐसी घटना थी जिसका कोई कारण कोई रचनाकार नहीं था |
हम सब मानने के लिए आज़ाद है की हम क्या चाहते है और येही वजह है की हमें आज यह समाज आ गया है की ईश्वर का अस्तित्व नहीं है ब्रह्माण्ड को किसी ने नहीं रचा और कोई हमारे भाग्य को न्रिधारित नहीं करता
इससे मुझे एक बड़ी अदभूत बात समझ आती है न ही तो कोई स्वर्ग है और ना ही कोई मौत के बाद का जीवन ब्रह्माण्ड के आकार को समझने के लिए हमारे पास एक ही जीवन है |
मौखिक से लिखित अनुवादक - अमित कोम्पनेरो
Sunday, February 12, 2012
बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की कविता
पकवानों की रेलमपेल
वे पाठ पढ़ाते हैं हमको
'सन्तोष करो, सन्तोष करो!'
उनके धन्धों की ख़ातिर
हम पेट काटकर टैक्स भरें
और नसीहत सुनते जायें --
'त्याग करो, भई त्याग करो!'
मोटी-मोटी तोंदों को जो
ठूँस-ठूँसकर भरे हुए
हम भूखों को सीख सिखाते --
'सपने देखो, धीर धरो!'
बेड़ा ग़र्क़ देश का करके
हमको शिक्षा देते हैं -
'तेरे बस की बात नहीं
हम राज करें, तुम राम भजो!'